Home थोड़ा हटके Holi मनाने की असली वजह शायद आपको पता न हो | Hindi

Holi मनाने की असली वजह शायद आपको पता न हो | Hindi

जानिए क्यों मनातें हैं? HOLI

हिंदू धर्म में होली मनाने के पीछे बहुत सी घटनाएँ मानी जाती है | जिनमें से की कुछ बहुत प्रसिद्ध है और कुछ नहीं है इसमें से लोगों को कुछ ही घटनाओं के बारे में पता है |

आपको बताते हैं वैसे ही एक घटना जो बहुत प्रसिद्ध है होली मनाने के पीछे | इस साल देशभर में होली 21 मार्च 2019 को मनाई जा रही है,  आज हम आपको बताते हैं कि होली मनाने  की पौराणिक कथा |

होली का त्यौहार आने ही वाला है सब लोग इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं होली के त्यौहार पर बहुत से तैयारियां की जाती हैं घर में गुजिया एवं मिठाइयां बनाई जाती हैं और एक दूसरे को भी बांटी जाती हैं | बच्चे आज के दिन रंग खरीदते हैं एवं पिचकारी और अन्य सामान बाजार से खरीदते हैं |

प्रहलाद की कहानी तो आप सबने सुनी होगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली मनाने का सिर्फ एक वही कारण नहीं था ? आज आपको बताते हैं होली मनाने की वह वजह जो शायद आपने कभी ना सुनी हो |

प्राचीन काल में कंस नाम का एक राजा हुआ करता था जो अपनी प्रजा को खूब परेशान और प्रताड़ित करता था | कंस बहुत स्वाभिमानी और अत्याचारी राजा था | राजा कंस अपनी बहन देवकी को बहुत प्यार करता था | कुछ समय के बाद कंस ने अपनी बहन देवकी की शादी वासुदेव के साथ कराने का निर्णय लिया | कंस इस रिश्ते से बहुत ही ज्यादा प्रसन्न था | लेकिन कंस की या खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई |

शादी के दिन ही एक आकाशवाणी हुई उस आकाशवाणी को सुनने के बाद राजा कंस की दुनिया हिल सी गई | आकाशवाणी में भगवान ने कंस को चेतावनी देते हुए बताया कि देवकी की आठवीं संतान से उसका वध होना निश्चित है यह सुनने के बाद राजा कंस बहुत क्रोधित हुए | इसके बाद उन्होंने देवकी और वासुदेव को अपने महल की एक काली कोठरी में बंद कर दिया | अपनी मृत्यु से भागने के लिए कंस एक-एक करके देवकी की संतानों को मारता रहा | कंस देवकी की आठवीं संतान के पैदा होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था |

कुछ समय बाद एक अंधेरी रात में देवकी ने अपने आठवीं संतान को जन्म दिया |आठवीं संतान श्री कृष्ण थे भगवान ने अपनी कृपा और अपनी माया से सभी पहरेदारों को बेहोश कर दिया और वासुदेव श्री कृष्ण भगवान को लेकर गोकुल  छोड़ आए इस बात का पता कंस को चल गया और उसने मायावी राक्षसी पूतना को बुलाकर गोकुल गांव के सभी नवजात शिशु को मारने का आदेश दे दिया |

पूतना को एक यह वरदान प्राप्त था कि वह अपने इच्छा अनुसार अपना रूप बदल सकती है इस प्रकार पूतना ने इस गांव के सारे नवजात शिशु को मारना शुरू कर दिया इसके बाद एक दिन आखिरकार पूतना यशोदा नंद के घर कृष्ण को मारने के लिए पहुंच गई |राक्षसी पूतना ने श्री कृष्ण को मारने के लिए अपना दूध पिलाने की कोशिश करी जिसमें के जहर था|

उसके बाद श्री कृष्ण ने उसका वध कर दिया उसका जहर पीने की वजह से श्री कृष्ण के शरीर का गहरा नीला रंग पड़ गया|कृष्ण बहुत सुंदर और गोरे रंग के थे जिससे कि अब उनका रंग नीला पड़ गया था|

इस बात को कृष्ण स्वीकार नहीं कर पा रहे थे उन्हें लगा कि उनका यह नीला रंग ना गोपियों को पसंद आएगा ना ही राधा को, जिस वजह से वह दूर हो सकते थे|

यशोदा मइया ने श्री कृष्ण जी को सलाह दी कि वह राधा को उसी रंग में डाल दे जिस रंग में वह उन्हें देखना चाहते हैं तब कृष्ण राधा के पास गए और उनके ऊपर रंग डाल दिया उसके बाद से वह एक दूसरे के प्यार में डूब गए और तभी इस दिनको  होली के उत्सव के रूप में मनाने जाने लगा|

उस दिन फाल्गुनी पूर्णिमा का दिन था इसलिए होली का त्यौहार हमेशा फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है

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